विकास दुबे की गिरफ़्तारी की कहानी पढ़िए, मैं हूँ विकास दुबे कानपुर वाला

विकास दुबे की गिरफ़्तारी कानपुर में हुए गोलीकांड के सात दिन बाद हो पाई है। उत्तर प्रदेश के कानपुर में आठ पुलिसवालों की हत्या के अभियुक्त विकास दुबे को आख़िरकार मध्य प्रदेश के उज्जैन के महाकाल मंदिर में  गिरफ़्तार कर लिया गया है, जल्द ही सौंपा जाएगा यूपी पुलिस को।

Prakash Dubey Kanpur

आरोप है कि विकास दुबे ने 2 जुलाई को कानपुर के बिकरु गाँव में गिरफ़्तार करने गई पुलिस टीम पर हमला किया था। पुलिस टीम पर की गई फ़ायरिंग में 8 पुलिसवालों की मौत हो गई थी।  इसके बाद विकास पर इनामी राशि लगातार बढ़ाई जा रही थी।  इनामी राशि बढ़कर पाँच लाख हो गई थी।

उज्जैन सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़, विकास दुबे ने गुरुवार सुबह महाकालेश्वर मंदिर पहुँचकर 250 रुपए की वीआईपी पर्ची कटवाई थी। पर्ची में नाम विकास दुबे ही लिखवाया गया। विकास के पास एक बैग था। विकास अपना बैग कहीं रखना चाहते थे। विकास ने एक व्यक्ति से बैग रखने की जगह भी पूछी। वो मंदिर के सामने प्रसाद की एक दुकान पर भी गए।

Ujjain Mahakal Mandir Prakash Dubey

ऐसा कहा जा रहा है की उसके बाद विकास दर्शन करने के लिए मंदिर के अंदर पहुँचे। जब विकास दुबे बाहर निकले तो पुलिस आ चुकी थी और उन्हें हिरासत में ले लिया गया। क्योंकि सिक्यॉरिटी गार्ड को शक हो चुका था और पुलिस को भी सूचना दे दी गई थी। विकास के दो साथियों बिट्टू और सुरेश को भी गिरफ़्तार किया गया है लेकिन अभी तक उनके बारे में ज़्यादा नहीं बताया गया है।

विकास दुबे को जब पुलिस उन्हें गिरफ़्तार करके ले जा रही थी तो वे चिल्लाते हुए बोल रहे थे कि “मैं विकास दुबे हूँ कानपुर वाला।”

गिरफ़्तारी के बाद विकास दुबे को महाकाल थाने ले जाया गया।  इस दौरान भी विकास ने मीडिया से बातचीत करने की कोशिश की, वहाँ विकास ने फिर चिल्लाकर कहा कि वो विकास दुबे है कानपुर वाला। फिर पुलिस ने विकास को चुप कराया। बताया जाता है कि पुलिस पूरी तरह से आश्वस्त हो जाना चाहती थी कि जिसे पकड़ा गया है वो विकास दुबे ही है। इसीलिए पुलिस विकास को थाने ले जाकर काफ़ी देर तक पूछताछ करती रही।
ऐसा भी कहा जा की, जिस व्यक्ति के पीछे पिछले एक हफ्ते से कई प्रदेशों की पुलिस लगी हो वो इतनी आसानी से कैसे अपनी गिरफ़्तारी दे सकता है, इसलिए उनसे सख़्ती से पूछताछ की गई।

इसके बाद मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी बयान दिया कि विकास दुबे की गिरफ़्तारी की जा चुकी है। अभी वो पुलिस की गिरफ़्त में है।  गिरफ़्तारी कैसे हुई, इसके बारे कुछ भी कहना सही नहीं है। वो क्रूरता की हदें शुरू से पार कर रहा था। इंटेलिजेंस की जहाँ तक बात है, अभी इस पर कुछ भी कहना सही नही होगा। वारदात के बाद से ही प्रदेश की पुलिस पूरी तरह से अलर्ट पर थी। इसके बाद धीरे -धीरे  जानकारी लगी।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी उसके बाद ट्वीट करके विकास दुबे की गिरफ्तारी की बात कही।

मध्यप्रदेश में राजनीति भी तेज़ हो गई गिरफ़्तारी होने के साथ ही, जहाँ प्रदेश सरकार इसे अपनी सफलता बता रही है, वहीं कांग्रेस ने सरकार को घेरते हुए इसे नाकामी बताया है।

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया, “यह तो उत्तर प्रदेश पुलिस के एनकाउंटर से बचने के लिए प्रायोजित सरेंडर लग रहा है। मेरी सूचना है कि मध्य प्रदेश भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के सौजन्य से यह संभव हुआ है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “जिनको लगता है कि महाकाल की शरण में जाने से उनके पाप धूल जाएँगे उन्होंने महाकाल को जाना ही नहीं। हमारी सरकार किसी भी अपराधी को बख्शने वाली नहीं है।

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